Friday, December 3, 2010

वो हसीन पल

प्रेषक : अक्षिता शर्मा एवं जो हन्टर

हाय, मैं अक्षिता, फिर से आपके लिये अपनी जिंदगी का एक हसीन पल लेकर उपस्थित हुई हूँ, मेरी प्रथम कहानी के लिये मुझे आपका बहुत ढेर सारा प्यारा मिला, सभी को अलग अलग जवाब देने के लिये मेरे पास समय भी कम पड़ गया। आप सभी को को मेरा दिल से प्यार और धन्यवाद।

आइए, आपको अभी ही 3 अक्टूबर 2009 की सच्ची बात बताती हूँ।

2 अक्टूबर 2009 को मेरे पति के ऑफ़िस की गांधी जयन्ती की छुट्टी थी, पर काम के सिलसिले में उन्हें आज बाहर जाना था ताकि अगले दिन वो बैठक में भाग ले सकें। आप जानते ही हैं कि खाली दिमाग शैतान का घर होता है, मेरे सेक्सी दिमाग ने एक दम से ही एक योजना बना डाली। मैंने अपने बॉय-फ़्रेण्ड कुलदीप को फोन कर दिया। मैंने नीता से भी कहा, पर डर के मारे उसने कुछ नहीं कहा।

कुलदीप समय पर आ गया था। हम दोनों शाम को बाज़ार घूमने निकल पड़े। वहां कुलदीप ने मेरे लिये ब्रा और एक छोटी सी प्यारी पेण्टी ली। मैंने भी उसके लिये एक बढ़िया सा अंडरवियर लिया। इसका सीधा सा मतलब था कि हमें रात की चुदाई में ये सब ही पहनना है। यही हमारी दिवाली का तोहफ़ा भी था।

रात ढलते ढलते हम घर आ चुके थे।

रात को जब मैं खाना बना रही थी तो कुलदीप अपने घर जाकर जाने कब लौट आया। नीता को उसके आने के बारे में पता नहीं था। नीता मुझसे कुलदीप के बारे में ही पूछ रही थी कि हम दोनों ने क्या क्या मजे किये ?

मुझे लगा कि उसकी चूत भी यह सोच सोच कर गीली हो रही थी कि मैंने लण्ड कैसे लेती हूँ, वगैरह।

मैंने उसे बताया कि यदि मैं बताऊंगी तो फिर अपने आप को रोक नहीं पाऊंगी।

"अरे वाह, ऐसा क्या किया था तुम दोनों ने ? बता ना दीदी?"

"अच्छा तू अपना काम खतम कर फिर बताऊंगी तुझे !"

हम दोनों ने फ़टाफ़ट अपना अपना काम समाप्त किया ... तभी मेरे मन एक प्यारा सा ख्याल आया कि क्यों ना नीता मेरे साथ मिलकर रात को चुदाई का मजा ले। मैंने नीता को कहा,"देख बात तो बहुत लम्बी है ... रात को मेरे साथ ही सो जाना ... मैं पूरी कहानी बता दूंगी !"

"हाय नहीं रे दीदी, तू कुछ ना कुछ गड़बड़ जरूर करेगी, मुझे तो शरम आयेगी !"

"तुझे सुनना है तो बोल वरना तेरी मर्जी ..."

ये सब बातें कुलदीप सुन रहा था, उसे लगा कि आज रात की चुदाई तो गई, पर उसे क्या पता था था कि मैं उसी के लिये तो नई चूत का इन्तज़ाम कर रही हूँ ! और नीता के लिये एक सोलिड नया लण्ड तैयार कर रही हूँ। नीता ने कुछ सोच कर कहा कि मुझे पूछना पड़ेगा उन्होने हां कह दी तो मैं अभी आ जाती हूँ।

जैसे ही नीता जाने लगी तो मैंने उसे पीछे से आ कर उसकी कमर को पकड़ कर अपने से चिपका लिया और उसकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ दबा दी ... और उत्तेजना में मसल दी ...

"उफ़्फ़्फ़्फ़, दीदी ... हाय रे ..." और वो हंस पड़ी

"सॉरी, नीता ... जल्दी आना ... मैं इन्तज़ार करूंगी" और हंस कर आंख मार दी।

"दीदी ... अब तो बड़ी बेशरम हो गई है तू ... अभी आती हूँ ..." नीता चली गई।

बैचेन सा कुल्दीप बाहर आया और असमन्जस में बोला,"अक्षी, आज की चुदाई का क्या होगा ...?"

"क्यों ... क्या हुआ ... तेरा लण्ड तो मस्त है ना ... या कुछ ...?"

"ओह्ह हो ... तुमने नीता को बुलाया है ना ...?"

"मेरे जानू, आज मैं तुम्हें वो मजा दूंगी कि हमेशा याद करोगे, बस अब देखते जाओ !"

कुलदीप के मुख पर एक प्यारी सी मुस्कुराहट तैरने लगी, शायद उसे कुछ अंदाज़ा हो गया था। खाना बनाने के बाद मैं बैठक में आ गई। कुलदीप नहाने चला गया ... कुछ ही देर में बाथरूम से उसने आवाज दी,"अक्सू, जरा यहाँ आना ...!"

मैं बाथरूम के पास गई और दरवाजा खोला। उसे देखकर मैं सन्न रह गई, वो पूरा नंगा था ... उसका मोटा और भारी लण्ड कड़क होकर सीधा तना हुआ था। मेरे मन में हलचल होने लगी। दिल धड़क उठा। उसे मैंने यों पहली बार देखा था। उसका नंगा और चिकना बदन, उस पर पानी की बूंदें उसे बला का सेक्सी बना रहा था। मेरे मन में वासना का उबाल आने लगा। मेरे चुचूक अकड़ गये, चूत से पानी रिसने लगा। वो खड़े खड़े अपना लण्ड हिला रहा था, उसका लाल सुपारा गजब ढा रहा था। मैं शर्माती हुई अन्दर चली आई, उसने मुझे आँख मार दी, मेरी नजरें झुक गई और मैंने धीरे से उसका फ़ड़फ़ड़ाता हुआ लौड़ा अपने हाथों में भर लिया।

"मेरी पीठ पर साबुन लगा दे ... जरा रगड़ कर ..." मैं उसकी पीठ पर साबुन मलने लगी, साथ ही साथ अपना हाथ उसके कड़े चूतड़ो पर भी फ़िसलने लगा।

उसके चूतड़ों की गहराई में हाथ घुस कर उसे मजे दे रहा था। दूसरे हाथ से मैंने उसकी चौड़ी छाती पर उसके जरा से निपल को मसलने लगी। मैंने उसकी छाती पर अपना सर रख दिया और साबुन वाले हाथ नीचे लण्ड पर उतर आये। उसके लण्ड पर साबुन मलते हुये उसका जैसे मुठ ही मारने लगी। कुलदीप ने अपनी आंखें बन्द कर ली ... और उसके गीले हाथ मेरे उन्नत वक्ष पर आ गये। कुछ ही देर में उसने मेरी चूचियाँ बाहर निकाल ली और एक दूसरे को मसला-मसली का दौर चल पड़ा। उसका पूरा शरीर साबुन के झाग से ढक गया था। जाने कब हम दोनों के होंठ आपस में जुड़ गये ... सच में बहुत आनन्द आ रहा था ... स्वर्ग जैसा आनन्द ... ।

लण्ड की घिसाई से वो बहुत आनन्दित हो रहा था। तभी उसने मुझे खींच कर शॉवर के नीचे कर लिया और पानी बरसा दिया। मेरे कपड़े भीग उठे, मेरे चिकने स्तन पानी से भीगे हुये थे। एकदम फ़ूल कर कड़े हो गये थे। मेरे गीले बदन को भोगने की नजर से देखने लगा ... मैं समझ गई थी कि अब उसका लण्ड मुझे चोदने के लिये तैयार है। मेरे हाथ उसके लण्ड पर तेजी से मुठ मार रहे थे। उसने मेरे रहे सहे कपड़े भी उतार दिये। मेरी आंखों में नशा सा छा गया। वो मुझे बेहद सेक्सी लगने लगा था। चुदने को चूत लपलपाने लगी थी। मुझे एक झुरझुरी सी आई और मैं उससे एक दम चिपक गई। हमारे अधर एक दूसरे को पी रहे थे ...

चूसने की आवाज यूं आ रही थी मानो आम चूस रहे हों ... क्या रस भरा महौल था ...

मेरा अंग अंग मसले जाने को बेताब हो रहा था। उसका लण्ड अब भी मेरी मुठ्ठी में था। उसने मेरे निपल को दांतो से काट सा लिया ... मेरी चूत पर जैसे आग में घी के जैसा असर होने लगा। चूत में आग सी लग गई,"दीपूऽऽऽऽ अह्ह्ह् ... मार डाला रे तूने तो ..."

"मेरी रानी ... तेरे अंग बहुत मद भरे हैं ... आह्ह्ह्ह"

मुझसे रहा नहीं जा रहा था। इसका सुन्दर, मोहक लण्ड मेरे दिल को पिघला रहा था। अनजाने में मैं नीचे बैठती गई और अब उसका मनमोहना सुन्दर लण्ड मेरे होंठो के पास था। मैंने उसका लाल तड़पता हुआ सुपारा अपने मुख में भर लिया और चूसने और काटने लगी।

"हाय रे ... मेरा लण्ड काट कर खा मत जाना ... श्स्स्स्स्स्स्स् ... निकल जायेगा रानी" उसकी सिसकी फ़ूट पड़ी। मैं अब जल्दी जल्दी उसके लण्ड को अपने मुख में अन्दर बाहर करने लगी, उसका लण्ड बुरी तरह से फ़ड़फ़ड़ा रहा था। वो भी झुक कर मेरे स्तनों को मरोड़ने और खींचने लगा। उसने मुझे अब प्यार से उठाया और खड़ा कर दिया। उसने मेरे मस्तक पर चूमा, फिर मेरे होंठो को, मेरे कंधे पर, फिर मेरे उरोज पर, नाभी पर ... हाय राम ...

वो तो मेरी चूत तक पहुंच गया। उसके होंठ मेरी गीली और चिकनी चूत के लबों में पहुंच कर उस रस का स्वाद लेने लगे ... मेरी चूत की चिकनाई में वासना से भरे बुलबुले भी उभर आये थे, जैसे चूत में रस का मन्थन हो रहा हो। मेरा वो पहला प्यार था, उसके लिये मैं सब कुछ कर सकती थी ... मेरे मन भी चूत चुसवाने को मचल रहा था। दिल को दिल से रहत होती है ... वो मेरी अदायें समझता था। मेरी टांग अपने आप एक तरफ़ उठ गई और मेरी चूत का मुख खुल गया उसकी जीभ मेरी चूत के अन्दर तक चाट रही थी। दाना फूल कर लाल हो गया था। बार बार होंठो से चुसने के कारण मेरे तन की आग भड़कने लगी थी।

मैंने उससे कहा,"कुलदीप मुझे तेरा लण्ड चूसना है ... बड़ा ही मस्त है रे ..."

वो मुस्करा उठा और वहीं बाथरूम में सीधा लेट गया। वो जब मेरी चूत चूसता है तो मेरा मन करता है कि मैं अलादीन का चिराग बन जाऊँ और जो वो मांगे दे दूं।

मैं कुलदीप पर उल्टा लेट गई। हम अब 69 पोजीशन में थे। वो मेरी चूत के रस का स्वाद ले रहा था और मैं उसके मोटे और सुन्दर लण्ड को बड़े प्यार से चूस रही थी, कभी कभी काट भी लेती थी और फिर उसके सुपारे के छल्ले को कस कर और खींच कर चूस लेती थी। मेरे अंगों में तरावट सी आने लगी ... जिस्म कंपकंपाने सा लगा ... एक मीठी सी लहर उठने लगी ...

"दीपू ... मेरा पानी निकल जायेगा ... हे मेरी मां ... कैसा कैसा हो रहा है ..."

"मेरी प्यारी अक्सू ... निकाल दे पानी ... तू मेरा रस पी सकती है तो क्या मैं तेरा रसपान नहीं कर सकता ...?"

मैं अपनी उच्चतम सीमा को पार करने ही वाली थी ... कि उसने चूसने की स्पीड बढ़ा दी और अपनी जीभ और दो अंगुलियाँ मेरी चूत में समा दी। मैं लहरा उठी और मेरी चूत उसके मुँह से भिंच गई और आग उगलने लगी ... पानी छूट गया ... मैं झड़ने लगी ...।

अब मेरी बारी थी, मैंने उससे कहा कि अब अपना वीर्य भी मुझ पिलाओ ...

उसने प्यार से मुझे सहला कर मुझे बैठा दिया और स्वयं अपना लण्ड मेरे सामने ले कर खड़ा हो गया।

"जानू आज अपने चेहरे को मेरे वीर्य से भिगा दो ... मैं अपना ही माल चाट कर देखूंगा !"

मैंने उसका लण्ड मुख में भर लिया और अपने हाथों की ताकत का इस्तमाल किया, कस-कस के मुठ मारने लगी। वो तड़प सा गया। उसका जिस्म लहराने लगा, उसके अंगों में बिजलियाँ दौड़ने लगी। उसने छटपटा कर मेरे मुख से लण्ड निकाल लिया और एक भरपूर मुठ मार कर निशाना बांध लिया। एक तेज वीर्य की धार निकल पड़ी और निकलती ही गई ... मेरा पूरा चेहरा जैसे नहा लिया हो ... कुछ तो मैंने अपने मुँह में भर लिया पर दूसरे ही पल में कुलदीप मेरे चेहरे पर लपक कर आ गया और अपना ही वीर्य चाटने लगा। उसकी जीभ मेरे चेहरे को गुदगुदाने लगी, मुझे बहुत ही आनन्द आया। मैं खड़ी हो गई, कुलदीप को मेरे चेहरे को भरपूर चाटने को मिल गया था। अभी भी वो मुझे चाट कम रहा था चुम्मा अधिक ले रहा था।

मैंने प्यार में भर कर उसे चिपका लिया और उसकी गर्दन में बाहें डाल कर झूल गई।

कुछ ही देर हम दोनों बाथरूम से बाहर आ गये और मैं अपने कपड़े उठाने लगी।

कुलदीप ने मुझे रोक लिया और कहा,"जानू हमरे बीच में कोई परदा तो नहीं है फिर कपड़ों की क्या जरूरत है, आज ऐसे ही , नंगे ही हम केन्डल लाईट डिनर करेंगे !"

मैं शरमा गई, हाय ऐसे कैसे नंगे होकर हम खाना खायेंगे। अपना गीला बदन लिये हुये मैं अपने बेड रूम में आ गई और आईने के सामने अपने आपको निहारने लगी। मैंने ऊपर एक झीना सा गाऊन डाल लिया। मैं आईने में अपना ही अक्स देख कर शर्माने लगी। सच में बहुत सेक्सी बदन थ मेरा ... मेरी उभरी हुई चूचियाँ फिर उस पर पानी बूंदें ... कोई भी मुझे चोदने को लालायित हो सकता था।

मैंने अपना गाऊन अपने शरीर पर कस कर लपेट लिया। बदन गीला होने से मेरी गीली चूचियाँ बाहर से ही अपना नजारा दिखाने लग गई थी। मैंने अपना सर झटका ...

हाय मैं ये क्या सोचने लग गई। मेरे गीले बदन से गाऊन चिपक गया था। मैंने गाऊन उतारा और नंगी ही बैठक में आ गई। कुलदीप सोफ़े पर लेटा सुस्ता रहा था ... उसका लण्ड मुरझाया हुआ था। मुझे देखते ही उसने मुझे अपनी तरफ़ बुलाया।

मैं जैसे ही उसके पास गई उसने मुझे अपने ऊपर गिरा लिया। उसका लण्ड फिर से खड़ा होने के लिये फ़ुफ़कार उठा। मैंने नजाकत देखते हुये उसके लण्ड को थाम लिया और उसके होंठो से होंठ मिला दिये। मुझे इस तरह नंगी घूमते देख कर वो एक बार फिर से भड़क गया।

"चलो हटो ना ... अब खाना खा लें ..."

कुलदीप ने मुझे छोड़ दिया।

तभी दरवाजे की घण्टी बजी। हम दोनों घबरा से गए।

"कौन है ...?"

"मैं नीता ..."

रात बहुत हो चुकी थी।

"रुको जरा मैं आई ..."

मैंने तुरंत ही कुछ सोच लिया और कुलदीप को बाथरूम में भेज दिया। मुझे नीता को हीट में जो लाना था।

"नीता साथ में और कौन है? रात में रुकेगी ना?"

"अरे बाबा, दरवाजा तो खोल, मेरे साथ कोई नहीं है ... तेरे पास ही तो आई हूँ !"

मैंने धीरे से दरवाजा खोला और यहाँ-वहाँ झांक कर देखा। कोई भी नहीं था, तब मैंने उसे अन्दर खींच लिया। मुझे पूरी नंगी देख कर वो चौंक गई। उसने पहली बार मुझे नंगी देखा था।

"ये क्या अक्सू ..."

"अभी नहा कर निकली थी कि तू आ गई ... इसलिये ऐसे ही आ गई !"

"आह्ह रे अक्सू ... तू भी ना ऽऽ"

"देख मैं अच्छी लगती हूँ ना, मेरे ये सब देख ... और बता ..."

वो झेंप गई और शरमा गई ...

"दीदी ...बस है ना ... ओह दीदी ... आप तो बला की सुन्दर हैं !"

"चल, आज मौका है ... तुझे एक सेक्सी बात जाननी थी ना ... आज तुझे लाईव दिखा दूँ !"

"मैं समझी नहीं दीदी ... क्या दिखाओगी ...?"

"सब कुछ समझ जाओगी ... देखो शर्माओ मत ... बता भी दो अब ..."

वो शर्मा उठी और मुस्कराते हुये धीरे से हां में सर हिला दिया। वो सब कुछ समझ चुकी थी कि मैं उसके साथ कुछ करने वाली हूँ। वो कुछ ऐसे ही विचार में डूबने सी लगी उसके मन में वासना का गुबार उठने लगा।

मैंने उसे कहा कि वो मेरे बेडरुम में चली जाये और चुपके से बिना आवाज के दरवाजे से झांक कर देखते रहना। वो कुछ असमन्जस में उठी और बेडरूम में चली गई।

मैंने कुलदीप को बाथ से बुला लिया ... वो कुछ आश्चर्य से बोला,"तुम ऐसे ही उसके सामने चली गई ... नंगी ... वो गई क्या?"

"अरे वो मेरी पड़ोसन है ... गई वो तो ... चलो खाना खा लें ..."

हम नंगे ही खाना खाने बैठ गये। खाना खाते समय वो मेरे स्तन दबा देता था, चुचूकों को ऐंठ देता था। मैं भी उसका लण्ड सहला देती थी। उसका भी खड़े लण्ड के साथ खाना मुश्किल हो रहा था। हमारी ये सब मस्ती नीता देख रही थी। मैं नीता को बार बार आँख मार रही थी। नीता भी ये सब देख कर उत्तेजित हो रही थी। कुलदीप ने एक ब्ल्यू फ़िल्म की सीडी निकाली और उसे लगा दी। पहले ही सीन में दो लड़कियां एक लड़के से चुदवा रही थी।

"कुलदीप, तुम्हारा मन एक साथ दो चूतों को चोदने का नहीं करता ?"

वो शरमा गया "अरे नहीं, तू ये क्या कह रही है ..."

"अरे बता ना ... बेचारा लण्ड तो कुछ कहेगा नहीं ..."

"देख बुरा मत मान लेना ... दो चूत चोदने का किसका मन नहीं करेगा ... फिर एक साथ दो लड़कियाँ क्युँ चुदवायेगी, खैर ! मेरे ऐसे नसीब कहाँ ..."

"अच्छा ... मेरे साथ तुम्हें चोदने को दो चूत मिल जायें तो ...?"

नीता सब सुन रही थी और उसे शायद ये मालूम हो गया था कि दूसरी चूत उसी की होगी।

पहले तो वो मना करता रहा पर मैंने उसे मना ही लिया। नीता अपने होंठों पर जीभ फ़िरा रही थी और अब अपने होंठ काटने लगी थी। उसकी चूत में रस चूने लग गया था।

मैं नीता को उत्तेजित करने के लिये कुलदीप का लण्ड पकड़ कर उसे हिलाने लगी। उसका लण्ड मस्ती से झूमने लगा। कड़क हो उठा ... नीता अपनी बड़ी बड़ी आंखों से उसे बड़े मोहक तरीके से निहार रही थी। मैं नीता को आंख मार कर मुस्करा रही थी। मैंने उसकी आंखों में उत्तेजना देखी और उसे इशारा किया लण्ड पकड़ने के लिये। उसने जल्दी से सर हिला कर मना किया। फिर मैंने उसे लण्ड मुँह में लेने का इशारा किया। वो शरमा कर हंस दी ... यानी कि हंसी और फ़ंसी। मैं समझ गई उसे ये सब पसन्द है। मैंने कुलदीप का लण्ड मुँह में लिया और चूसने लगी और उसे देखने लगी। फिर मैं अपनी अंगुली अपनी चूत में डाल कर हिलाने लगी।

वो उत्तेजना से बेहाल थी। मैंने उसे फिर इशारा किया कि वो बाहर आ जाये।

उसने शर्म के मारे फिर ना कर दिया। मुझे लगा कि उसे समझाना पड़ेगा। मैं अन्दर गई और उससे कहा तो बोली कि शर्म आती है। मैंने उसके बोबे दबाये और कहा,"क्यूँ ! मन चुदने का नहीं हो रहा है क्या ?"

उसका शर्माना उसकी हां कह रहा था। वो शरमा कर नीचे देखने लगी। उसने धीरे से सर हिला कर हां कहा। पर फिर कहा कि वो मुझे देख लेगा तो। मैंने उसे स्कीम बताई, मैं लाईट बन्द करके अंधेरा कर दूंगी फिर जब मैं घोड़ी बनूं तो मैं उसे तेरे पास ले आऊंगी वो तुझे चोद देगा।

कुछ भी ना बोलना और हां वो लण्ड मेरा है, उसे हाथ भी मत लगाना। यह कह कर दोनों ही हंस पड़ी।

मैं वापस आकर उसके लण्ड से खेलने लगी और वो मेरे चुचूकों से खेलने लगा। फिर एक हाथ मेरी चूत पर रख कर उसे रगड़ने लगा। फिर चूत में अंगुली डाल कर अन्दर-बाहर करने लगा। उसका लण्ड मेरी चूत को मिसकॉल मारने लगा। मैं सोफ़े पर झुक गई और वो मेरी चूत खोलकर उसे चाटने लगा। मैं सिसकियाँ भरने लगी।

नीता सिसक उठी, मेरी नजरें उसी पर थी। कुलदीप ने अपना पूरा लण्ड चूत में घुसा दिया। मेरे मुख से उफ़्फ़्फ़्फ़ निकल गई। उसके लण्ड को चूत में से निकाल कर मैंने उसे अपने मुख में भर लिया और चूसने लगी। वो तड़प उठा और बोला,"अक्सू ... आज तो अपनी गाण्ड प्यारी के दर्शन करा दे ..."

मुझे भी बहुत समय हो गया था गाण्ड मरवाये सो मैंने भी लण्ड को गाण्ड का रास्ता दिखा दिया।

गाण्ड गीली होने से उसका लण्ड सट से छेद में घुस पड़ा। कुलदीप बोला,"अरे चूत इतनी टाईट कैसे हो गई?"

मैं हंस पड़ी। उसे मालूम था या वो अन्जान बन रहा था।

"सुनो जनाब, आपका लौड़ा मेरी गाण्ड में है, तुम्हें पता ही नहीं चला कि लौड़ा तुमने किस छेद में डाला?"

यह सुन कर वो खुश हो गया। मैं गाण्ड चुदाने के नशे में डूब गई। तभी मुझे नीता का ध्यान आया। मैंने घूम कर उसे देखा तो वो अपनी चूत दबा कर सिसकियाँ भर रही थी।

मैंने कुलदीप को देखा वो मस्ती में मेरी गाण्ड चोदे जा रहा था।

"सुनो बेड रूम में चलो, तुम्हें एक सरप्राईज देना है !"

" हाय, वो सब बाद में ! पहले पानी तो निकाल दूं !"

"नहीं, पहले आओ तो ... चलो ...!" मैं उसे धकेलते हुये बेडरूम में ले आई। तभी उसे नीता की एक झलक मिली, नीता तुरन्त ही परदे के पीछे छिप गई। उसे लगा कि शायद उसे भ्रम हुआ है। वो बिस्तर पर लेट गया। मैं उसके ऊपर लेट गई और उसकी आंखों पर अपनी चुन्नी बांध दी।

"अब रुको, मैं अभी आई ..." मैंने लाईट बन्द कर दी। मैंने नीता को बुलाया और उसे सब समझा दिया। नीता ने उसके खड़े लण्ड को धीरे से अपने मुँह में ले लिया। पर उसकी स्टाईल अलग थी ... उसका तरीका अलग था।

"जल्दी कस कर चूसो ना ..." मैंने नीता को इशारा किया। उसने लण्ड मसलते हुए जोर से चूसने लगी। फिर भी उसमे मेरी वाली बात नहीं आ रही थी। पर नीता को तो मस्ती चढ़ने लगी थी। उसकी आंखें बंद हो चली थी। यह देख कर मैंने लाईट जला दी। लाईट जलते ही नीता ने मेरी तरफ़ देखा। मैंने इशारा किया ... चूसे जाओ ...

मैंने नीता के पूरे कपड़े उतार दिये और उसे पूरी नंगी कर दिया। मैंने जोश में उसकी चिकनी चूत में अंगुली डाल दी, वाह क्या चूत थी उसकी ...बहुत ही प्यारी सी, चिकनी ... गुलाबी उसमें काम-रस भरा हुआ। मैंने उसकी उसकी चूत में अपने होंठ चिपका दिए और उसकी रस भरी चूत का पान करने लगी।

"बस, अक्सू ... अब चूत में लण्ड डाल दो ..." मैंने नीता को इशारा किया तो वो उठ कर उसके लण्ड पर बैठ गई। उसका लण्ड नीता की चूत में घूत में घुसने लगा।

"आज क्या हो गया है ... तुम्हारी चूत तो अलग सी लग रही है ?"

नीता के चेहरे पर शर्म की लालिमा तैर गई। मैंने जवाब दिया,"अच्छा मजाक कर लेते हो ... जरा लौड़े का कमाल तो दिखाओ !"

नीता शरमाते हुये अपनी चूत ऊपर नीचे करने लगी और बड़े प्यार से चुदने लगी।

मैं भी कुलदीप के दोनों और टांगें करके खड़ी हो गई और अपनी चूत नीता के मुख से सटा दी। नीता चुदते हुये मेरी चूत चूसने लगी। बड़ी खूबसूरत चुदाई चल रही थी। नीता अब सम्पूर्णता की ओर बढ़ने लगी थी। उसने धीरे से कहा,"दीदी, मैं तो आह्ह्ह गई ..."

"रुक जा तू धीरे से उठ जा " मैं अब कुलदीप के लण्ड पर चढ़ गई और लण्ड पूरा घुसा लिया। नीता को सामने खड़ी कर लिया और उसकी चूत में दो अंगुलियाँ डाल कर उसकी चूत चोदने लगी। वो झड़ने लगी ... उसका पानी निकल गया। वो शांत हो गई। अब नीता धीरे से वहां से हट गई। मैं घोड़ी बन गई और कुल्दीप मेरी चूत चोदने लगा। मेरी चूत अब रिसने लगी थी। मैं आनन्द से सराबोर हो चुकी थी।

मैं भी अब झड़ने के कगार पर थी। मजे लेते लेते मन कर रहा था कि कभी ना झड़ूँ ...

पर आखिर में मेरा पानी छूट ही गया। मैंने जल्दी से उठ कर अपनी चूत कुलदीप के मुख से सटा दी ... उसने मेरे रस का स्वाद लिया और जोर से चूत को चूसने लगा। मैं चूत चुसाने के बाद उल्टी हो कर उसके खड़े लण्ड का वीर्य निकालने के लिए उसे चूसने लगी। नीता की जीभ भी लपालपा उठी, मैंने नीता को पूरा मौका दिया चूसने का। कुलदीप कुछ ही देर में नीता के मुख में ही झड़ गया। नीता को थोड़ा अजीब लगा पर मैंने उसे पूरा पी जाने कहा। उसने पूरा लण्ड साफ़ किया और उठ कर बाहर चली गई। मैंने कुलदीप से कहा कि मैं अभी मुँह साफ़ करके आती हूँ ...

उसकी आंखों से मैंने अपनी चुन्नी खोल दी। कुलदीप मन्द-मन्द मुस्करा रहा था।

मैं बाहर आई तो नीता का चिकना सुघड़ शरीर देख कर दंग रह गई। मैंने उसकी कमर पकड़ कर उसकी चूत में अंगुली डाल दी। वो हंस पड़ी। फिर उसे हटते ही मैंने अपना मुख भी साफ़ कर लिया। नीता सोफ़े पर चादर डाल कर सो गई। मैं भी भीतर जाकर कुलदीप का लण्ड पकड़ कर सो गई।

सवेरे उठते ही मुझे झटका लगा। कुलदीप मेरे साथ नहीं था। मैंने धीरे से उठ कर परदे से झांका तो वो नंगा खड़ा था और नीता के नंगे बदन को देख कर मुठ मार रहा था। नीता की चादर नीचे गिर गई थी। मैंने धीरे से जाकर कुलदीप का हाथ लण्ड से छुड़ाया और बताया कि वो रात उससे चुद चुकी है। उसे कहा कि अब देर किस बात की है ... अब खुल कर चोद डालो ...

कुलदीप ने मेरी तरफ़ देखा और धीरे से उसके पास आ गया और उसकी चूत पर अपना लण्ड लगा दिया। थोड़ा सा जोर लगाते ही वो अन्दर उतर गया।

नीता जाग गई ... और कुलदीप को अपने ऊपर पा कर जैसे धन्य हो गई। उसके हाथ कुलदीप की कमर पर लिपट गये, दोनों एक होने के लिये मचल पड़े। उसकी नजर ज्योंही मुझ पर पड़ी ... वो सब कुछ समझ गई। मुझे आंखों ही आंखों में धन्यवाद कहा और अपनी आंखें बंद कर ली ... नीता की शरम अब जा चुकी थी ... उसने अपनी टांगें ऊपर कर ली और कुलदीप का एक नया सफ़र आरम्भ हो गया।

मैंने ईश्वर को अपनी इस सफ़लता पर धन्यवाद किया। और रोज़मर्रा के कार्य पर लग गई। आज तो चुदाई का आगाज था ... आगे जो चुदाई होनी थी, उसे सोच सोच कर नीता बेहाल हुई जा रही थी।

Sunday, November 7, 2010

कुँवारी बुर

प्रेषक : वी हैकर्स

हाय ! मैं समीर, मेरी पहली कहानी "मार डाला रे" आप लोगों ने पसन्द की और मुझे मेल भी किया… इसके लिये धन्यवाद। मैं आज आपको अपनी एक और यौन-कथा अन्तर्वासना के माध्यम से बताने जा रहा हूँ।

मैं गुड़गांव में रहता हूँ। यह बात उस समय की है जब हमारे पड़ोस में एक लड़की अपने मामा के यहाँ रहने आई। उसका नाम मोनिका था। वो बिहार की रहने वाली थी, उसका रंग सांवला था पर उसके स्तन एकदम सेब की तरह टाइट थे। उसके कूल्हे मस्त थे, जब वो चलती थी तो उसके कूल्हों की उठा-पटक देख कर गली के लड़कों के लंड ज़िप तोड़ने के लिये बेकरार हो जाते थे।

वो कभी-कभी हमारे घर टीवी पर मूवी देखने आ जाती थी। जब वो हमारे यहाँ आती थी तो मेरी नजरें सिर्फ़ उसके कूल्हों पर ही रहती थी। उसके स्तन उसकी चोली को फाड़ने के लिये बेबस होते नजर आते थे।

एक दिन हमारे घर के सभी लोग एक शादी में गये थे। उस दिन जब वो हमारे यहां आई तब मैं अपने घर में इंगलिश मूवी देख रहा था, वो चुपचाप आकर मेरे पीछे खड़ी हो गई मैंने उसे नहीं देखा, मूवी में चुदाई का सीन आ रहा था, लड़का अपना लंड लड़की की गांड में दे कर चुदाई का मजा लूट रहा था। मैं भी अपने मोटे लंड को हाथों में लेकर बैठा था, मेरा लौड़ा टाइट होता जा रहा था, अचानक पीछे रखे गिलास के लुढ़कने की आवाज आई तो मैंने घूम कर देखा तो मोनिका मेरे पीछे खड़ी मूवी को बड़े ध्यान से देख रही थी, उसकी आंखें बिल्कुल लाल हो रही थी। मैंने जल्दी से पास पड़े तौलिए को उठा कर अपने लौड़े पर डाल लिया।

वो भी सकपका गई। मैंने उसको अपने पास बैठने के लिये बोला तो वो आकर बैठ गई। मैंने उससे पूछा- तुम कब आई?

तो वो शरमाते हुए बोली- जब हीरो हिरोइन को किस कर रहा था, तब !

मैं समझ गया कि उसने पूरी चुदाई देखी है। मैंने उसके हाथ को छुआ तो वो पूरी कांप रही थी, मेरे हाथ पकड़ने का उसने कोई विरोध नहीं किया। मैं समझ गया कि आज तो जिंदगी का मजा लूटा जा सकता है। मैंने उससे पूछा- आज हमारे यहीं रूकोगी क्या ? क्योंकि आज हमारे यहां भी कोई नहीं है।

मैं यह जानना चाहता था कि उसके मन में क्या है, तो वो बोली- मुझे डर लगता है !

मेरा लौड़ा चोदने के लिये बेकरार था, उसने लाल रंग की गहरे गले की चोली पहन रखी थी, उसके स्तन ऊपर से बाहर झांक रहे थे, वो बहुत सेक्सी लग रही थी।

मैंने उसको खाने के लिये स्वीट्स दी, मैंने टीवी का चैनल नहीं बदला। थोड़ी देर बाद फिर चुदाई के दृश्य आये तो मैं उसकी तरफ़ देखने लगा, उसकी आंखें सेक्स से भरी नजर आ रही थी।

हीरो ने जैसे ही अपना लौड़ा बाहर निकाला तो उसके मुँह से उफ निकला मेरा लौड़ा भी टाइट हो रहा था, मैंने उसके कंधों पर अपना हाथ रखा तो वो बिल्कुल मेरे करीब आ गई। मेरे हिम्मत बढ़ गई, मैं अपने हाथ को धीरे-धीरे उसके वक्ष के ऊपर ले जाकर उनको सहलाने लगा। उसके मुँह से मीठी-मीठी आवाजें आने लगी। मैंने उसकी चोली को धीरे से ऊपर सरकाना शुरु कर दिया। नीचे उसने ब्रा भी नहीं पहन रखी थी। वो मस्त होती जा रही थी।

वो बोली- मुझे डर लग रहा है !

मैंने पूछा- क्यों जान?

तो वो बोली- मैंने आज तक सेक्स नहीं किया है !

मैंने सोचा कि मुझे बना रही है, मैं बोला- डरो मत ! मैं सिखा दूंगा।

मैंने उसकी चूत पर अपना हाथ रख दिया तो देखा कि उसकी चूत ने पानी छोड़ रखा था। मैं धीरे-धीरे उसकी चूत को सहलाने लगा। उसने मुझे बाहों में भर लिया। मैंने उसकी कच्छी को उतार दिया, वो शरमा गई। फिर मैंने उसको कहा कि अब वो मेरे कच्छे को उतार दे।

वो फ़िर शरमा गई, तब मैंने अपने लंड को आजाद कर लिया। वो मेरे लंड को प्यासी नजरों से देखने लगी और बोली- यह तो बहुत मोटा है मेरी चूत तो फट जायेगी ?

मैंने कहा- रानी यह तुझे जवानी के मजे देगा !

वो बोली- अब मैं क्या करूं ?

तो मैंने कहा- जिस तरह फ़िल्म की हिरोइन कर रही थी, वैसे ही कर !

उसने मेरे लंड को अपने हाथों में ले लिया और हिलाने लगी। फिर धीरे से लौड़े को अपने मुँह में लेने लगी। मेरा लंड इतना मोटा था कि उसके मुँह में नहीं आ रहा था। वो उसे चाटने लगी। मेरा लंड बार-बार हिल रहा था। उसको लंड चाटने में मजा आ रहा था, वो बोली- यह इतना मस्त लग रहा है कि दिल कर रहा है कि इसको खा जाऊं !

मैंने कहा- जान, अगर तो इसको खा जायेगी तो मैं तुझे कैसे चोदूंगा ?

फिर धीरे-धीरे उसने लंड के टोपे को मुँह में ले ही लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। मैं अब उसकी चूत में अपनी उंगली डालने के लिये चूत पर घुमाने लगा। उसकी चूत पर छोटे-छोटे बाल थे उसकी चूत बिल्कुत उभरी हुई थी। पर मेरी उंगली उस चूत में आगे नहीं बढ़ी तो मैं समझ गया कि वो बिल्कुल अनछुई है। मैं बहुत खुश हुआ कि आज तो कुंवारी चूत की सील तोड़ने का मौका मिल ही गया।

मैंने उसको बाहों में उठा लिया और बेडरूम में ले गया, उसको बड़े प्यार से बेड पर लिटा दिया। अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे। उसके कूल्हे वास्तव में जैसे बाहर से दिखते थे उससे भी कहीं ज्यादा गोल और कसे थे।मैंने उसे कहा- अपनी टांगें चौड़ी कर ले !

उसने वैसा ही किया। अब मेरा लौड़ा उसकी सील तोड़ने के लिये मस्त हो रहा था।

मैंने अपने लंड को आगे किया और कुंवारी चूत से भिड़ाया तो वो मस्ती से हिल पड़ी। मैं शॉट लगाने को बिल्कुल तैयार था, मैंने अपने लौड़े को उसकी चूत में थोड़ा सा लगा कर अन्दर किया तो वो चिल्ला पड़ी- हाय ! मेरी चूत फट जायेगी !

तब मैंने अपने लंड को वापस बाहर निकाल कर उस पर क्रीम लगाई। अब वापस लौड़ा उसकी चूत में डालने लगा तो वो दर्द से तड़प उठी, अपने कूल्हों को हिलाने लगी तो मैंने कहा- जान, बस एक बार थोड़ा सा दर्द होगा, फिर जिंदगी भर तुम लंड के मजे ले सकती हो।

वो बोली- आज तो मैं मजे लेकर रहूंगी !

उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया। मेरे लौड़ा आठ इंच का है, मैंने धीरे-धीरे लौड़े को चूत में डालना शुरू किया। दो धक्के मारने पर लंड का टोपा उसकी मस्त चूत में घुस गया। वो दर्द से तड़प गई। मैं दो मिनट के लिये वैसे ही लेटा रहा। उसने अपनी चूत को जैसे ही थोड़ा ढीला किया, मैंने एक जोर का झटका मारा तो मेरा लंड उसकी चूत को फाड़ता हुआ पूरा घुस गया।

वो बुरी तरह चिल्ला उठी- हाय, मार डाला !

उसकी चूत से गरम-गरम खून आने लगा। शायद उसने नहीं देखा, मैं कुछ देर रुक गया।

थोड़ी देर में उसने अपने कूल्हे हिलाने शुरू कर दिये तो मैं समझ गया कि अब दर्द कम हो रहा है। बस फिर मैं अपने लंड को हिलाने लगा उसकी चूत में मेरा लंड टकराने लगा। वो कस-कस कर लंड का स्वाद लेने लगी। मैं बीस मिनट तक उसकी चूत को अपने लंड से चोदता रहा।

अब वो भी पूरे मजे ले रही थी। मेरा लंड टाइट चूत में टकरा २ कर घायल हो गया। उसकी मस्त चूत ने पानी छोड़ दिया उसकी चुदाई में मुझे बहुत मजा आ रहा था। मेरा लंड उसकी चूत को नहलाने को तैयार था। मेरे लंड की तेज पिचकारी ने उसकी चूत को पूरा भर दिया, उसने अपनी टांगें जब तक ढीली नहीं की जब तक मेरे वीर्य की आखिरी बूंद नहीं निकल गई।

अब हम दोनों अलग हो गये तो वो बहुत खुश नजर आ रही थी, मेरे होंठों पर चूम कर वो बोली- राजा, आज तूने मुझे लड़की होने का मजा दे दिया ! आज मैं पूरी रात इस मजे को लूंगी !

मैंने भी कह दिया- तेरी सील बहुत टाइट थी पर मेरे इस लंड ने आखिर उसे फाड़ ही दिया।

वो बोली- तेरा लंड नहीं। यह तो हथौड़ा है ! यह दीवार में भी छेद कर दे ! यह तो मेरी कुंवारी चूत थी।

फिर वो रसोई में जाकर दूध ले आई, हम दोनों ने दूध पिया। तब उसने चादर को बदल दिया, बोली- इसे बाद में धोएंगे, पहले लंड का और मजा तो ले लूँ। मैं बाथरूम में जाकर अपने लंड को धो आया, आज मैं बहुत खुश था, वापस आते ही उसने मेरे लंड को मुँह में ले लिया। वो बोली- आज इसने मेहनत की है, देखो, लाल हो गया है।

थोड़ी देर में मेरा लंड फिर चुदाई के लिये तैयार था। इस बार मैंने उसको कुतिया बना कर चोदा। वो आज बहुत खुश थी। यारो, क्या बताऊँ कि जिंदगी में मैंने ऐसी चुदाई पहली बार की।

उसके बाद वो अपने घर बिहार वापस चली गई पर दोबारा आने को कह गई। अब इन्तजार है कि अगले महीने वो आयेगी तो आगे की कहानी फिर आने पर सुनाउंगा।

Wednesday, November 3, 2010

लण्ड दिखा कर चोदा

प्रेषक : चिंतन

मेरे मित्र ने मुझे कुछ ही दिन पहले अन्तर्वासना के बारे में कहा था। पढ़कर बहुत मज़ा आया और अपना भी अनुभव आप लोगों तक पहुँचाने का मन किया।

मुझमें एक आदत है- कोई भी लड़की मेरी तरफ़ देखती है तो दूसरे ही पल मैं उसके वक्ष को देखता हूँ और तुरन्त ही नीचे चूत की तरफ़ देखता हूँ और दांतों से होंट काटते हुए उसकी आँखों में देखता हूँ। अगर वो फ़िर मुझे देखती है तो जान जाता हूँ कि काम की है और उसी पर थोड़ा लाइन मारता हूँ।

तो दोस्तो, बात एक साल पहले की है। हमारे पड़ोस में सामने वाले घर में अपने रिश्तेदार के यहाँ एक नई लड़की रहने आई। उसका नाम रोमा है, 19 साल की पजाबी लड़की थी। दिखने में किसी हिरोइन से कम नहीं थी। जो भी देखता था तो देखता रह जाता था। पर बहुत ही घमन्डी थी। और दोस्तो, मुझे घमन्डी लड़की को चोदने को बहुत मन करता है। जब से आई, उसे चोदने का मन बना लिया था।

नसीब से हम दोनों का बेडरूम फ़स्ट-फ़्लोर पर ही था और दोनों की गैलरी भी आमने-सामने ही थी। दो तीन दिन निकल गये वो जरा भी इधर-उधर नहीं देखती थी।

एक दिन शाम को मेरी तबियत ठीक न होने के कारण मैं जल्दी ही घर आ गया था और सोने के लिये बेडरूम में आ गया तो देखा तो रोमा अपनी गैलरी में खड़ी थी। मैंने सोचा- मौका अच्छा है।फ़िर तुरन्त ही अपना पैन्ट उतार के, वो मुझे देख सके, उस तरफ़ मुँह करके अपने लण्ड को तेल लगा-लगा कर मालिश करने लगा।

जैसे ही उसने मुझे नंगा देखा, तुरन्त अपने कमरे में भाग गई। दोस्तो, मेरा लण्ड अगर किसी भी औरत या लड़की ने देखा तो चखने का मन बन ही जाता है। फ़िर मैंने खिड़की के काँच से देखा तो पता चला कि वो दरवाजे के पास कुर्सी डाल कर चुपके से मेरे कमरे में झांक रही थी। मैंने सोचा- मेरा काम हो गया।

फ़िर मैं भी कुर्सी ले कर दरवाजे के पास जाकर बैठ गया और तेल लगाकर मुठ मारने लगा। वो छुप-छुप के देख रही थी और शरमा रही थी और देख भी रही थी। उसे जरा भी पता नहीं था कि मैं जानबूझ के उसे दिखा रहा हूँ। फ़िर उसे और भड़काने के लिये ही मैंने मेरी भाभी से पानी लाने को कहा।

वो तो दंग रह गई। एक तो मैं पूरा नंगा था और भाभी को बुला रहा था। भाभी जैसे ही पानी लेकर आई, मुझे देखकर बोली- शरम नहीं आती? जब देखो तब लेकर बैठ जाते हो !

मैं उठ कर भाभी के पास गया और उसे पीछे से पकड़ लिया और मस्ती करते करते ठीक दरवाजे के पास लाकर भाभी के पीछे से ब्लाउज के उपर से ही भाभी के स्तन दबा रहा था। भाभी मुझे डाँटते हुए मुझसे छुटने की कोशिश कर रही थी और बोल रही थी- रात को आऊँगी ! जी भर के चोद लेना ! और कहने लगी- छोड़ो, कोई देख लेगा।

मुझे तो दिखाना ही था ! भाभी को कहाँ मालूम मेरी योजना। यह सोच कर मन ही मन मैं मुस्कुराने लगा और उनके बाल पकड़ के पीछे से चूमने लगा। हमारा यह नज़ारा देख कर रोमा और पगल हो रही थी और घूर घूर कर देख रही थी। मैं धीरे धीरे भाभी के स्तनों को दोनों हाथों से जोर जोर दबा रहा था। अब भाभी को मजा आ रहा था और मेरा विरोध करना बन्द कर दिया।

फ़िर मैंने एक हाथ से उसकी साड़ी को ऊपर उठाया और उसकी पैन्टी में हाथ डाल कर भाभी की चूत में उंगलियाँ डाल कर मसल मसल कर मुठ मारने लगा। थोड़ी देर में भाभी की साड़ी खुल गई तो मैंने पैन्टी भी उतार दी।

एक हाथ दरवाज़े पर टिका दिया और पीछे से अपना लण्ड भाभी की चूत के पास लाकर आगे से चूत को लगा कर ऊपर नीचे करने लगा। भाभी बेड पर ले जाने को बोल रही थी। मैंने मना किया और एक झटका मार दिया तो आधा लण्ड अन्दर चला गया। एन्गल ऐसा था कि चूत में घुसा हुआ आधा लण्ड रोमा को साफ़ दिखाई दे रहा था।

और रोमा को देख कर मैं भी जोश में आने लगा और भाभी को गपागप चोदे जा रहा था। ऊपर से दोनों हाथों से दोनों चूचियों को बेरहमी से दबा रहा था और साथ में भाभी के होंठों को चूस-चूस के मजे ले रहा था। हम दोनों के चक्कर में भाभी को मजा आ रहा था और मुँह से तरह तरह की आवाजे निकाल रही थी- आऽऽ आआ अह, या आह्ह, उफ़्फ़, बस, छोड़ो मुझे, जाने दो, कोई देख लेगा !

भाभी की आवाजों से रोमा भी उत्तेजित होने लगी। बीच बीच में लण्ड बाहर निकाल के अन्दर डाल रहा था। मलाई से लोट-पोट लण्ड देख कर रोमा से रहा नहीं जा रहा था। लण्ड अच्छा दिख रहा था। फ़िर झटके तेज करके लगा रहा था। दस मिनट तक एसे ही चोदता रहा, इतने में भाभी की चूत से पानी निकल गया तो वो मेरे हाथ से छुट गई और अपने कपड़े उठा के वहाँ से चली गई।

फ़िर मैंने रोमा के सामने आकर लण्ड हाथ में लेकर मुठ मार-मार कर पानी निकाल दिया। जैसे ही मेरे लण्ड से पानी निकला, तो पानी जैसे उसके मुँह में गिरा हो, उस तरह रोमा अपना थूक निगल रही थी। इतने में रोमा के दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी तो वो उठकर गई और मैं भी छुप गया।

दूसरे दिन भाभी ने मुझसे चायनीज़ खिलौनों की दुकान से फ़ाईबर का लण्ड मंगवाया। भाभी को शादी हुई दो साल हुए, मेरे भैया से उनको चूत का सुख नहीं मिलता था। उसे अब तक भैया ने कम, मैंने ज्यादा चोदा है।

तो रात को 9-30 बजे जब मै बडरुम में गया तो देखा कि रोमा अपने कमरे में बैठकर टी वी देख रही थी और थोड़ी-थोड़ी देर बाद मेरे कमरे की तरफ़ देख रही थी। मैं समझ गया कि उसे चूत का खेल फ़िर से देख्नना है। फ़िर मुझे भी भाभी को फ़ायबर के लण्ड का मज़ा देना था।

जैसे ही मैंने भाभी को आवाज़ दी, रोमा ने अपने कमरे की लाइट बन्द कर दी और अपने बेड पे जाकर खिड़की में नजर टिका कर बैठ गई। पर टीवी चालू होने के वजह से साफ़ पता चल रहा था कि वो मुझे देख रही है।

घर पर आज भी मेरे और भाभी के अलावा कोई नहीं था। इतने में भाभी दूध ले कर ऊपर आ गई। भाभी को भी घर पर कोई न होने का पूरा मजा लेना था। आते ही वो भी सीधा बेड पे आ गई। मैंने सारे कपड़े उतार दिए और उनके बाल खुले करके लेटा दिया। फ़िर भाभी टांगें ख़िड़की की तरफ़ करके उसकी चूत चाटने लगा। फ़िर उंगलियों से मसलने के बाद जब चूत पूरी तरह गीली हो गई तो मैंने फ़ायबर का लण्ड भाभी की चूत में धीरे से घुसेड़ दिया।

घुसते ही भाभी चिल्लाई। रोमा को भी कुछ नया दिख रहा था। जैसे ही पूरा लण्ड अन्दर गया, भाभी और चिल्लाने लगी, क्योंकि वो काफ़ी मोटा था और लम्बा भी था।

मैं थोड़ी-थोड़ी देर में रोमा को देख रहा था। अब वो पूरी तरह से पलट कर हमें देख रही थी। फ़ायबर के लण्ड से थोड़ी देर चोदने के बाद मैंने भाभी को उल्टा करके कुतिया बनाया और भाभी की गाण्ड में थूक लगा के गीला कर दिया फ़िर धीरे से अपना लण्ड अन्दर घुसेड़ दिया। भाभी दर्द के मारे आहें भर रही थी। धीरे-धीरे भाभी की गाण्ड खुल गई। फ़िर मैं उठ-उठ कर चोदने लगा। तो भाभी का हाल- न कहा जाये न सहा जाये ! ऐसा था।

थोड़ी देर गाण्ड चोदने के बाद भाभी को उठा के बाल पकड़ कर मुँह में लण्ड दिया। वो लण्ड चूसने में माहिर है। मुँह से ही कभी कभी लण्ड ढीला करके पानी निकाल देती थी। थोड़ी देर बाद भाभी को सीधा करके दस बारह झटके मारते ही भाभी झड़ गई और ऐसे ही पलंग पर सो गई।

तब मैंने लाइट बंद कर दी और चुपके से दरवाजे से होकर गैलरी से कूद कर रोमा की गैलरी में गया और दरवाजे से अंदर जा के सीधा लाइट चालू किया जोर से कहा- क्या देख रही हो कब से?

रोमा एकदम डर गई। वो पूरी नंगी थी। उसकी उंगलियाँ चूत में थी। मैं उससे पास गया फ़िर भी वो उठी नहीं। उसे लगा कि उसकी चोरी पकड़ी गई। मौके का फ़ायदा उठा के मैंने उसे पकड़ लिया और उसे चूमने लगा। वो कुछ भी नहीं बोल पा रही थी।

फ़िर ज्यादा देर न करके उसे लिटा कर उसकी चूत में उँगली डाली तो पता चला चूत पूरी गीली और एकदम कंवारी थी। मैं अपना लण्ड चूत के मुख पर रख कर ऊपर-नीचे घिसाता रहा और फ़िर जोर से एक झटका दिया तो आधा लण्ड अन्दर घुस गया।

रोमा जोर से चिल्लाई- ओ…मा…॥

फ़िर रोमा ने अपनी जांघें जकड़ ली दर्द के मारे ! मुझे हिलने नहीं दे रही थी। रोमा का ध्यान दर्द से हटाने के लिये मैं उसके स्तन मसल रहा था। एक साथ दोनों जगह का आनंद लेते लेते रोमा ने अपनी टांगें थोड़ी चौड़ी कर ली। मैंने भी मौका देखकर जोर से दो चार झटके दिए तो इस बार पूरा लण्ड रोमा की चूत को फ़ाड के अंदर चला गया।

रोमा के मुँह से उप्स्स्स्स्स की आवाज निकली। फ़िर उसके चाहने पर भी ना रुका ! गपागप रोमा की मस्त चूत को चोदता ही रहा। उसके मुँह से आवाज रुक नहीं रही थी- आहाह्ह्ह्ह उईईई माँ ! और 5 मिनट में रोमा स्खलित हो गई। दस बारह झटके लगा के मैंने भी पूरा का पूरा पानी अंदर ही छोड़ दिया और चुपचाप अपनी चड्डी पहनकर अपने कमरे में आ गया।

रात को चार बजे एक बार देखने गया तो रोमा अभी भी ऐसे ही सोई हुई थी। उसका नंगा बदन देख के मेरे मन को लगा कि फ़िर मौका मिले ना मिले, एक बार और चोद लेता हूँ।

और फ़िर चालू हो गया। दस मिनट चोद के फ़िर पूरा पानी अंदर ही छोड़ कर आ गया।

तीन दिन के बाद रोमा अपने शहर चली गई। लेकिन उसने मुझे फ़िर नहीं देखा। बीस दिन के बाद अचानक वो फ़िर से आई और रात को मुझे अपने कमरे में बुलाया। मैं खुशी से गया तो पता चला कि उसका मासिक जो 15 तारीख को आता था वो नहीं आया ! वो तो डर गई थी, यही बताने खास वो यहाँ आई थी। मैंने उसे दवाई दी तो उसका मासिक हो गया।

अब हमारी अच्छी दोस्ती हो गई, अपना मोबाइल नम्बर दे गई। महीने में एक बार उसे मिलने जाता हूँ तो चोद के ही आता हूँ।

Thursday, October 21, 2010

कहानी एक रात की


प्रेषक : राहुल रायचन्द

मेरे चाची की एक भतीजी थी जो देखने में बहुत ही सुंदर थी। वो इतनी सुंदर थी कि मानो कोई परी हो ! मैं जब भी उसे देखता तो सोचता कि काश यह मेरी गर्ल-फ्रेंड होती तो कितना अच्छा होता ! देखते ही देखते वो और बड़ी हो गई और मैं भी बड़ा हो गया और अब मैं सब समझने लग गया था क्योंकि मेरी उम्र 21 साल की हो गई थी और वो मुझसे बड़ी थी इसलिए उसकी उम्र 23 साल हो गई थी। समय के साथ-साथ उसका फीगर और भी ज्यादा सेक्सी हो गया था, उसकी चूची इतनी बड़ी हो गई थी कि जैसे दो मोसम्म्बी हों रस से भरी हुई ! और उसकी गांड तो इतनी सुन्दर लग रही थी कि जो भी देखे बस यही सोचने लगे कि बस एक बार इसे मसल दूँ ! उसे देखकर कोई भी उसे मन में ही चोद दे इतनी सुन्दर थी वो !

समय बीतता चला गया। फ़िर एक बार हुआ यूँ कि हमारे घर पर एक कार्यक्रम था जिसमें सभी को बुलाया था, सो वह भी आई थी। उसे देखकर मैं तो जैसे ख़ुशी के मारे पागल ही हो गया था। मैंने बिना कुछ सोचे समझे बस उसका हाथ पकड़ा और उसे अपने कमरे में ले गया ! हम दोनों बचपन से ही खूब बाते करते थे इसलिए किसी ने कुछ नहीं कहा ! फ़िर मैंने उससे उसके हाल चाल पूछे और इधर की ढेर सारी बात करी लेकिन मेरे मन में तो कुछ और ही चल रहा था सो मैंने उससे पूछ लिया कि इतनी बड़ी हो गई हो, कोई दोस्त बनाया या नहीं?

तो उसने नहीं में जवाब दिया। मुझे यह सुनकर और भी ख़ुशी हुई और मैंने उसे एक आँख मार दी तो उसने कहा- तेरा इरादा कुछ ठीक नहीं लग रहा है ?

फिर मैंने उसे कहा- मैं तुझे बहुत चाहता हूँ और बहुत पसंद करता हूँ। लेकिन तुझे मैं कैसा लगता हूँ? क्या तू मुझे पसंद करती है?

तो उसने कुछ जवाब नहीं दिया और बस मेरी तरफ आँख मार के चली गई ! फ़िर मैंने उससे थोड़ी देर बाद यही पूछा तो कहने लगी- तू यह सब क्यों पूछ रहा है? तू मुझे अच्छा लगता है और इसीलिये ही मैं तुझसे बात करती हूँ।

तो फिर मैंने उसे “आई लव यू” कह दिया और उसके गाल पर एक चुम्मा जड़ दिया। जवाब में उसने भी चुम्मा दे दिया। फ़िर हम दोनों कमरे से बाहर आ गए और वो अन्य लोगों से बातें करने लग गई और मैं घर के काम में लग गया।

फ़िर जब शाम हुई तो मैंने उसको अपने कमरे में आने का इशारा किया। जब वो कमरे में आई तो मैंने उसे जोर से पकड़ लिया और उसके होठों पर अपने होंठ रख दिये और उसके होठों का रस पीने लगा।

क्या होंठ थे ! उसके एकदम शहद से भरे !

मैंने उसके अधर इतनी जोर से चूसे कि वो गुलाबी से लाल हो गए।

और फ़िर वो भाग गई बाहर !

उसके बाद अगले दिन वो जब भी मुझे देखती अपने होठों को काटने लगती। फ़िर शाम हो गई और घर पर कार्यक्रम चालू हो गया। सभी लोग बाहर थे, मैं भी बाहर था लेकिन घर का सारा काम मुझे ही करना था इसलिए मैं घर के अंदर गया और उसे भी इशारा कर दिया। फ़िर हम दोनों घर में अकेले ही रह गए और हमने खूब चूमा-चाटी की। फ़िर मैंने अपना एक हाथ उसकी चूची पर रख दिया, जिससे वो सिहर गई और मेरा हाथ हटाने लगी। तब मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उसकी दूसरी चूची पर भी हाथ रख दिया।

वो उत्तेजित हो गई और अपने होठों को काटने लगी और मुझसे कहने लगी- मैं….

पूरी कहानी यहाँ है !

रेलगाड़ी में पेल मारी

प्रेषक : लव सिंह

मेरी अन्तिम परीक्षाएँ समाप्त हो चुकी थीं और मैं उदयपुर से अपने पैतृक नगर सूरत ट्रेन से जाने वाला था। शाम के चार बजे थे, मैं सही समय पर स्टेशन पहुँच गया था, मेरी सीट किनारे और नीचे वाली थी। मैं ट्रेन में बैठा हुआ सोच रहा था कि आगे क्या करना है। वैसे ट्रेन में कोई अधिक भीड़ नहीं थी। जैसे ही ट्रेन चलने लगी, मैंने देखा कि एक औरत जो लगभग तीस-बत्तीस साल की थी, आई। उसने मुझसे पूछा- आपकी सीट कौन सी है?

मैंने उसे बताया – “सीट नम्बर ग्यारह”

उसने अपनी टिकट देखी उसकी सीट की संख्या बारह थी, यानि ऊपर वाली सीट। उसके साथ उसका तीन साल का लड़का भी था। वह खिड़की पर आकर बैठ गया।

उस महिला ने मुझसे पूछा,”क्या सामान रखने में आप मेरी थोड़ी सी सहायता कर सकते हैं?”

मैंने उसकी सहायता की और सारा सामान सही-सही सीट के नीचे रख दिया। वह ऊपर जाकर बैठ गई। उसका लड़का नीचे ही बैठा था और मेरे साथ खेल रहा था।

ट्रेन चलती गई, एक घंटे के बाद पहला स्टेशन आया, तो वह नीचे उतर आई और चाय वाले को आवाज़ देकर चाय लेकर पीने लगी। मैंने भी चाय ली। जब वह पैसे देने लगी, तो मैंने कहा कि मैं दे देता हूँ, और मैंने दोनों की चाय के पैसे दे दिए। थोड़ी देर बाद हम बातें करने लगे। वह नीचे की सीट पर ही बैठी थी।

“मेरा बच्चा परेशान तो नहीं कर रहा है?”

“नहीं… बिल्कुल नहीं” मैंने उत्तर दिया।

“आप कहाँ जा रही हैं?” चाय पीते-पीते ही मैंने उससे पूछा।

“मुम्बई !” उसने बताया।

“आपके पति नहीं जा रहे हैं?”

उसने बताया कि उसका तलाक़ हो चुका है और वह अपने भाई के घर जा रही है। कुछ देर की चुप्पी के बाद हमारी बातें दुबारा शुरु हो गईं।

उसने मुझसे पूछा,”आप क्या करते हैं?”

“मैंने अभी-अभी कॉलेज की पढ़ाई खत्म की है और मैं घर जा रहा हूँ।”

थोड़ी देर बाद मैंने अपने बैग में से मिक्सचर नमकीन निकाले और उसे ऑफर किया तो वो भी मेरे साथ खाने लगी। अब मैं उसके बिल्कुल पास बैठा था और मैंने मिक्सचर वाला हाथ उसकी गोद में रख दिया तो मेरा हाथ उसकी जाँघ को छूने लगा। ट्रेन के हिलने से मेरा हाथ उसकी जाँघ से रगड़ रहा था, शायद उसे भी अच्छा लग रहा था।

फिर हम दोनों के बीच काफी बातें हुईं। उसने मुझसे पूछा- क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेण्ड है?

तो मैंने कहा- नहीं !

उसने कहा- ऐसा हो ही नहीं सकता।

तो मैंने कहा- कोई पसन्द ही नहीं आई।

थोड़ी देर बाद शाम के सात बज गए और बाहर अन्धेरा हो गया। ट्रेन क़रीब-क़रीब खाली थी। हम लोगों को कोई भी देखता तो यही समझता था कि पति-पत्नी होंगे क्योंकि हम काफी आराम से बातें कर रहे थे।

कुछ देर के बाद मैं पैर फैलाने को हुआ तो वह सरक गई। मैंने भी उससे कहा- आप थक गईं होंगी, आप भी पैर फैला लीजिए।

वह भी अधलेटी सी हो गई। अब उसके पाँव मेरी ओर और मेरे पाँव उसकी ओर थे। उस समय थोड़ी-थोड़ी ठंड लग रही थी, तो मैंने शॉल ओढ़ ली। मेरा एक पाँव उसकी गाँड से और उसका एक पाँव मेरी गाँड से छू रहा था।

थोड़ी देर में मुझे अच्छा लगने लगा और वह भी उत्तेजित हो गई। मेरा लंड खड़ा हो गया। फिर मैंने थोड़ी और आज़ादी से अपने पैरों को उससे छुआया तो वह कुछ भी नहीं बोली। मैं भी समझ चुका था कि वह तैयार है। अब वह भी मुझे ठीक से छूने लगी थी। मैंने खुज़ली करने के बहाने उसके पैरों को छुआ तो उसने कहा- ठीक से पैर फैला लो।
………………..
पूरी कहानी यहाँ है !

Tuesday, October 12, 2010

britney spears photos gallery


Britney Jean Spears is an American pop music singer,dancer,songwriter, hollywood actress and celebrity. She was born on 02-12-1981 to James Parnell Spears, a building contractor and Lynne Irene Bridges,a former grade school teacher in McComb, Mississippi.She was raised in Kentwood, Louisiana.
Britney Jean Spears debut album,"Baby One More Time", released in 1999, brought her the international stardom.Spears married her childhood friend Jason Allen Alexander on 03-01-2004.She gave birth to her first child, Sean Preston Federline, on 14-09-2005 in Santa Monica, California.Spears gave birth to her second son, Jayden James Federline, on 12-09-2006 in Los Angeles.Her profile simply looks like this,

Name: Britney Jean Spears
Birth date: 02-12-1981
Birth place: McComb, Mississippi, USA
parents: James parnell spears and Lynne Irene Bridges
Brother: Bryan
Sister: Jamie Lynn (actress)
Genre: Pop, Dance, urban pop
Occupation: singer,songwriter,dancer,actress
Label: Jive


Ana Beatriz Barros gallery

Ana Beatriz Barros is a Brazilian model.She was born in a small town of Itabira, Minas Gerais, Brazil. Her parents are Sônia and Reinato Barros. Barros father was a mechanic engineer and her mother was a house wife.She has two sisters, Patricia and alu. Ana Beatriz Barros is the youngest among the three.

She is one of the most successful Brazilian supermodels. She has done advertisements for Guess?, Bebe, Victoria's Secret, Chanel cosmetics, and Jennifer Lopez's JLo fashion line.

Ana Beatriz currently resides in New York. She formerly dated British model James Rousseau, and art gallery owner Helly Nahmad, whom she dated for 4 years. She is best friends with fellow Brazilian model Alessandra Ambrosio. She was named #96 in FHM magazine's "100 Sexiest Women in the World" supplement in 2006.

Name: Ana Beatriz Barros
Birth Place: 29-05-1982
Birth Place: Itabira, Minas Gerais, Brazil
Height: 5ft 11in
Hair color: Naturally Dark Brown
Eye color: Green
Measurements: 35-24.5-35



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